मनीष असाटी, नईदुनिया, टीकमगढ़। जलसंकट और पिछड़ेपन के लिए पहचाने जाने वाले बुंदेलखंड से अब स्वच्छता का ऐसा मॉडल सामने आया है, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। घरों से निकलने वाले गंदे पानी (ग्रे-वाटर) की समस्या को टीकमगढ़ जिले के बड़े हिस्से में ठीक कर दिया गया है। ग्राम पंचायतों में लागू भूमिगत ड्रेनेज और ग्रे-वाटर प्रबंधन माडल के लिए टीकमगढ़ को आईएससी (इंडिया सैनिटेशन कोएलिशन) -फिक्की सैनिटेशन अवार्ड-2026 से सम्मानित किया गया।
मंगलवार को नई दिल्ली में इंडिया सैनिटेशन कान्क्लेव में कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने यह पुरस्कार प्राप्त किया। इस नवाचार को आईएससी राष्ट्रीय पत्रिका में केस स्टडी के रूप में भी प्रकाशित किया जाएगा।
गंदे पानी से समाधान तक, 70 प्रतिशत पंचायतों में बदली व्यवस्था
टीकमगढ़ जिले में कुल 324 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें से 225 यानी 70 प्रतिशत पंचायतों में भूमिगत ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जा चुका है। जिला प्रशासन का लक्ष्य अगले तीन माह में सभी पंचायतों में इस व्यवस्था को लागू करना है। सभी ग्राम पंचायतों में यह मॉडल अपनाने के संबंध में प्रस्ताव पारित किए जा चुके हैं। अब पंचायतों में नई खुली नालियां बनाने पर रोक है।